श्रावण मास अर्थात सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और साधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस महीने में शिव भक्त विशेष पूजा-अर्चना और व्रत रखते हैं, ताकि भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकें।
इस महीने का नाम श्रावण क्यों…?
आचार्य राजेश कुमार शर्मा इसके दो कारण बताते हैं स्कंद और शिव पुराण के अनुसार प्रथम, इस महीने पूर्णिमा तिथि पर श्रवण नक्षत्र होता है। इस नक्षत्र के कारण ही महीने का ये नाम पडा।
दूसरा कारण, भगवान शिव ने सनतकुमार को बताया कि इसका महत्व सुनने के योग्य है। जिससे सिद्धि मिलती है, इसलिए इसे श्रावण कहते हैं।
श्रावण का महीना भगवान शिव के लिए इतना विशेष क्यों ?
आचार्य राजेश शर्मा बताते हैं पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रावण मास में ही समुद्र मंथन हुआ था और इस दौरान निकले विष का पान भगवान शिव ने किया था। इस विष के प्रभाव को शांत करने के लिए सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है। वैसे भी सावन का महीना बारिश का महीना होता है, जो हरियाली और जीवन का प्रतीक है। इस महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा भी इसी से जुड़ी है, जिससे भगवान शिव के मन और तन को शांति मिलती है।
श्रावण मास में सोमवार का महत्व क्यों?
श्रावण के महीने में सोमवार को भगवान शिव की पूजा और व्रत का विशेष महत्व होता है।
इसे ‘सावन सोमवार’ कहा जाता है। नारद पुराण के अनुसार श्रावण मास के प्रथम सोमवार से अंतिम सोमवार तथा जो लोग चालीसा करते हैं वह लोग आषाढ़ शुक्ल षष्ठी से श्रावण पूर्णिमा तक जितने भी सोमवार आते हैं किये जाने वाले इस व्रत में विशेष रूप से भगवान शिव की सोमेश्वर नाम से पूजा की जाती है। यह व्रत अर्थ सिद्धि प्रदाता है। शास्त्रों में भी सोमवार के दिन भगवान शिव और चंद्रमा की पूजा का विधान बताया गया है। इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक करने से मानसिक क्लेशों से छुटकारा भी मिलता है।
सावन व्रत और वैज्ञानिक कारण
सावन सोमवार का व्रत वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी होता है। इस महीने में जब बारिश शुरू होती है, तो इससे पाचन तंत्र धीमा हो जाता है। ऐसे में ऐसा खाना अच्छा होता है, जो पचने में आसान हो। इसीलिए, कई हिंदू श्रावण के महीने में शाकाहारी खाना खाते हैं और व्रत रखते हैं, जो उनके स्वास्थ्य और पाचन के लिए अच्छा होता है।
आचार्य राजेश कुमार शर्मा
badaunexpress.com badaunexpress.com | www.badaunexpress.com
