“हर्र लगे न फिटकरी, रंग चोखा आये: 1 रुपये के कागज पर 100 से 200 की चपत, CHC गेट बना ‘तहरीर मंडी’!”
उझानी-बदायूं 6 मई।
उझानी का CHC सरकारी अस्पताल के गेट के बाहर कुर्सियां डालकर बैठे ‘मुंशी टाइप’ बाबूओं की चांदी कट रही है। फरियादी खून-पसीने की कमाई तहरीर लिखाने में गंवा रहे हैं। शिकायत लेकर थाने पहुंचे तो वर्दीधारी मुंशी टका सा जवाब देता है— “बाहर से साफ-साफ लिखवाकर लाओ”।
बाहर निकलते ही घेर लेते हैं ‘तहरीर-वीर’ एक रुपये का कोरा कागज, दो चार लाइन की दरख्वास्त और जेब से निकल गए पूरे100 या 200 रुपये! दिनभर में 15-20 तहरीर लिखकर ये बाबू 2 से 3 हजार रोज कमा रहे हैं। कमाई ऐसी कि हर्र लगे न फिटकरी, रंग चोखा आये।
कानूनन पुलिस को खुद फरियादी की जुबानी सुनकर तहरीर लिखनी है। गरीब को तो संविधान मुफ्त वकील देता है। फिर ये 200 रुपये की ‘लेखन-फीस’ किस कानून से वसूली जा रही है।
नाम न छापने की शर्त पर एक फरियादी बोला “साहब, अंदर मुंशी जी पेन तक नहीं उठाते। कहते हैं हैंडराइटिंग खराब है, बाहर से टाइप या साफ-साफ लिखवाकर लाओ। बाहर जाते ही 200 का झटका। मजबूरी में देना पड़ता है, नहीं तो सुनवाई कौन करेगा ?”
CHC गेट पर दिनदहाड़े चल रही इस ‘तहरीर मंडी’ पर कोतवाली पुलिस की आंखें बंद हैं। सूत्र बताते हैं कि बिना ‘शह’ के ये खेल चलना मुश्किल है।
थाने आऐ फरियादियों का कहना है कि एसएसपी साहिबा बदायूं को चाहिए कि ऐसे मुंशियों पर 154 CRPC (अब बीएनएस की 173 ) की धारा की याद दिलाएं और दलालों पर भ्रष्टाचार का शिकंजा कसें। वरना जनता यही कहेगी— थाने में न्याय नहीं, ‘तहरीर का ठेका’ चल रहा है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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