इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पत्नी और तीन बच्चों की हत्या के मामले में 23 वर्ष जेल काट चुके आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान आपराधिक न्याय प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच और अभियोजन की खामियों के कारण निर्दोष लोगों को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है। फैसले के साथ ही कोर्ट ने न्याय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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