5:18 am Friday , 31 July 2026
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क्यों किया था श्री कृष्ण ने द्रौपदी के लाज की रक्षा ?

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आज का प्रेरणादायक प्रसंग
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🪴🥀 क्यों की थी द्रौपदी ने भगवान शिव की कठोर तपस्या ? 🥀🪴
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क्यों किया था श्री कृष्ण ने द्रौपदी के लाज की रक्षा ?
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महाभारत युद्ध में भी महादेव कहीं न कहीं से जुड़े हुए थे. महाभारत का सबसे मुख्य पात्र जिसकी वजह से ये युद्ध हुआ वो थी द्रौपदी. महादेव के वरदान से ही द्रोपदी को पांच पति की प्राप्ति हुई. द्रोपदी एक दृढनिश्चियी महिला थीं. जो स्त्री का अपमान नहीं झेल सकती थी. चाहे वो खुद का हो या फिर किसी और स्त्री का. हैं. द्रौपदी कभी पराजय को स्वीकार नहीं करती हैं. वे एक निडर स्त्री के तौर पर नजर आती है. आइए जानते हैं द्रौपदी के जीवन से जुड़ी कुछ अहम बातें।

भीष्म पितामह और आचार्य द्रोणाचार्य की निंदा की
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द्रौपदी अनैतिक कृत्य को कभी बर्दाश्त नहीं करती थीं. यही कारण था कि जब भारी सभा में द्रौपदी का चीर हरण कर अपमान किया गया तो सभा में बैठे भीष्म पितामह, गुरु द्रोण और कृपाचार्य जैसे महारथियों की कठोर निंदा करती हैं और उन्हें अगाह करती है आपके इस कृत्य के लिए इतिहास कभी आपको माफ नहीं करेगा।

द्रौपदी का जन्म
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द्रौपदी राजा द्रुपद की पुत्री थी. राजा द्रुपद पांचाल देश के राजा थे. जिस कारण द्रौपदी को पंचाली भी कहा जाता है. राजा द्रुपद ने द्रौपदी को कुरु वंश के नाश के लिए यज्ञ किया, जिसके फलस्वरुप उन्हें एक पुत्र और एक पुत्री की प्राप्ति हुई. यज्ञ से उत्पन्न होने के कारण द्रौपदी को याज्ञनिक भी कहा जाता है. यज्ञ से जो बालक पैदा हुआ उसका नाम धृष्टद्युम्न था।

शिवजी का वरदान
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द्रौपदी को पूर्व जन्म में पति का सुख प्राप्त नहीं हो सका. इसलिए उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की. शिवजी प्रसन्न हुए और उन्होंने द्रौपदी को वरदान मांगने के लिए कहा. तब द्रौपदी ने सर्वगुणयुक्त पति प्राप्ति का वरदान शिवजी से मांगा. वरदान के कारण ही द्रौपदी को पांच पति प्राप्त हुए जो अलग अलग गुणों से युक्त थे. द्रौपदी को आजीवन कुंवारी रहने का भी वरदान प्राप्त था. जिस कारण द्रौपदी अपने सभी पतियों के साथ समान व्यवहार कर पाती थीं. सभी पतियों के साथ पत्नी धर्म को निभाते हुए भी द्रौपदी हमेशा कुंवारी रहीं।

भीम से था विशेष लगाव
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द्रौपदी का अर्जुन को सबसे अधिक प्रेम करती थीं लेकिन उन्हें पांचों पांडव में से सबसे अधिक लगाव भीम से था. इसका कारण ये था कि पांचों पांडव में भीम पहले ऐसे व्यक्ति थे जो द्रौपदी के साथ होने वाले अन्याय पर सबसे पहले विरोध करते थे. चीर हरण के दौरान भी भीम ने ही सबसे अधिक विरोध किया था यही नहीं भीम ने ही दुशासन वध करने की प्रतिज्ञा ली थी और द्रौपदी की प्रतिज्ञा को भी भीम ने ही पूरा किया था. इसीलिए कहा जाता है कि द्रौपदी को भीम से विशेष लगाव था।

श्रीकृष्ण को मानती थीं भाई और सच्चा मित्र
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द्रौपदी भगवान श्रीकृष्ण का बहुत सम्मान करती थीं. द्रौपदी भगवान श्रीकृष्ण को अपना सच्चा मित्र और भाई मानती थी. यही कारण था कि जब द्रौपदी पर संकट आया तो भगवान श्रीकृष्ण दौड़े चले आए और उनके सम्मान की रक्षा की।

द्रौपदी महाकाली का अवतार थीं
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द्रौपदी के कई अन्य नामों से भी जाना जाता है. जिनमें उन्हें पांचाली, यज्ञसेनी महाभारती और सैरंध्री के नाम से भी जाना जाता है. द्रौपदी को महाकाली का अवतार भी कहा जाता है. कहा जाता है कि उनका जन्म अभिमानी राजाओं का अभिमान नष्ट करने के लिए हुआ था जो पृथ्वी पर अधर्म को बढ़ावा दे रहे थे।

क्यों किया था श्री कृष्ण ने द्रौपदी के लाज की रक्षा ?
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महाभारत युद्ध के मुख्य पात्र थी द्रौपदी. उनका जन्म ही महाभारत के युद्ध के लिए हुआ था. और द्रौपदी के सबसे खास उनके सखा श्रीकृष्ण थे. वहीं उनको राह दिखाते थे. हर पग पर श्री कृष्ण द्रौपदी की मदद करते थे. एक बार जब शिशुपाल का वध करते समय भगवान श्रीकृष्ण के उंगली में चोट लग गई. चोट लगते ही भगवान श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त की धारा बहने लगी. यह दृश्य देख द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी के पल्लू को फाड़कर भगवान श्रीकृष्ण उंगली पर बांध दी. जिससे रक्त बहना बंद हो गया. जिस दिन यह घटना हुई उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी. कहते हैं तभी से रक्षाबंधन के पर्व को मनाने की परंपरा आरभ हुई. रक्षाबंधन को लेकर कई अन्य पौराणिक कथाएं भी हैं. महाभारत में काल युद्ध के दौरा भगवान श्रीकृष्ण युधिष्टिर को सैनिकों के हाथों में रक्षा सूत्र बांधने के लिए कहा था. राखी को रक्षा सूत्र भी कहा जाता है।

द्रौपदी का चीरहरण
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जुए के खेल में जब युधिष्टिर अपना सबकुछ हार गए तो शकुनि ने द्रौपदी को दांव पर लगाने के लिए कहा. कुटिल शकुनि ने द्रौपदी को भी दांव में जीत लिया. द्रौपदी को दांव में हरने पर दुशासन भारी सभा में बालों से पकड़कर द्रौपदी को घसीट कर लाता है. द्रौपदी का भरे दरबार में भयंकर अपमान किया जाता है. द्रौपदी का जिस समय अपमान हो रहा था तब उस सभा में भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और विदुर भी विराजमान थे. लेकिन किसी ने विरोध नहीं किया. इन लोगों के मौन रहने के बाद दुर्योधन ने द्रौपदी का चीरहरण का आदेश दिया. तब द्रौपदी ने रोते हुए अपनी आंखों को बंद किया और भगवान श्रीकृष्ण को याद किया।

भगवान श्रीकृष्ण को शिशुपाल वध के दौरान द्रौपदी को दिया हुआ वचन याद आता है और वे द्रौपदी की लाज बचाने के लिए दौड़ पड़ते हैं. भगवान श्रीकृष्ण द्रौपदी की लाज बचाने के लिए लीला रचते हैं और ऐसा चमत्कार करते हैं जिससे द्रौपदी की साड़ी लगातार बढ़ने लगती है और दुशासन साड़ी खींचते-खींचते बेहोश हो गया. इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा की और अपना वचन पूरा किया।

🙏 राधे राधे 🙏

गूगल से साभार

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