💐🌿 भक्ति, आनंद और परंपरा से सम्पन्न हुआ तुलसी–शालिग्राम विवाह समारोह 🌿💐
बदायूं। देवस्थान श्री रघुनाथ जी मंदिर (पंजाबी) में रविवार की संध्या को भक्ति और उल्लास से ओतप्रोत वातावरण में तुलसी–शालिग्राम विवाह का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ।
मंदिर प्रांगण दीपों, पुष्पों और जयघोषों से झिलमिला उठा — हर ओर “जय तुलसी माता” और “जय शालिग्राम भगवान” की गूंज सुनाई दे रही थी। 🌸
🌿 विवाह से पूर्व मंदिर में मेंहदी एवं हल्दी की रस्में परंपरागत विधि-विधान से सम्पन्न हुईं,
जिन्होंने इस दिव्य विवाह की पृष्ठभूमि को और भी मंगलमय बना दिया।
💫 शालिग्राम जी की बारात – उल्लास और भक्ति का संगम


सायं 4 बजे के लगभग शालिग्राम जी की बारात बड़े हर्षोल्लास के साथ मंदिर परिसर से प्रस्थान हुई।
रथ पर सवार भगवान शालिग्राम जी को देखने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
ढोल, मंजीरों और शंखनाद की गूंज के बीच
भक्तगण राधे-राधे के जयकारों के साथ नाचते, झूमते आगे बढ़े।
छोटी-छोटी बच्चियां पीले और लाल परिधानों में पारंपरिक गीतों पर थिरकती हुईं
इस दिव्य बारात की शोभा बढ़ा रही थीं।
🌸 दरवाजे पर नोक-झोंक और हंसी-ठिठोली का रंग
माता तुलसी के आँगन में जब बारात पहुँची,
तो दरवाजे पर लाल रिबन, सालियों द्वारा नेक की मांग और हंसी-मज़ाक का सुंदर दृश्य देखने को मिला।
महिलाओं की खिलखिलाहट, पुरुषों की तालियां और मंगल गीतों की गूंज से माहौल आनंदमय हो उठा।
💛 मिलनी और विवाह की पवित्र रस्में


इसके पश्चात मिलनी कार्यक्रम आरंभ हुआ,
जहाँ वर पक्ष श्री वरुण आहूजा परिवार और वधू पक्ष श्री रमेश बत्तरा परिवार ने परंपरागत रूप से एक-दूसरे का तिलक कर स्वागत किया।
ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ
कन्यादान, माल्यार्पण, फेरे और सप्तपदी की सभी रस्में विधिवत सम्पन्न हुईं।
फूलों की वर्षा और दीपों की झिलमिलाहट के बीच यह पवित्र क्षण भावविभोर कर देने वाला था।
🌿 विवाह उपरांत प्रसाद वितरण के दौरान भक्तों ने एक-दूसरे को बधाइयाँ दीं
और विवाह को धर्म, संस्कृति और भक्ति का प्रतीक बताया।
मंदिर परिसर संगीत, जयघोष और आनंद के स्वर से देर रात तक गूंजता रहा।


🙏 श्री सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष श्री देवेंद्र कुमार चड्ढा जी ने बताया कि
ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को भक्ति और एकता के सूत्र में बाँधते हैं। मीडिया प्रभारी हेमंत कुमार दुआ ने कहा कि
“तुलसी–शालिग्राम विवाह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं,
बल्कि यह हमारी सनातन परंपरा की जीवंत झलक है,
जिसमें भक्ति, संगीत और प्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिला।”
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