8:02 pm Tuesday , 21 July 2026
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भगत सिंह तुम जिंदा हो हर एक लहू के कतरे में- प्रेमपाल सिंह

शहीद ए आजम भगत सिंह के
जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर शाहिद पार्क कचहरी परिसर बदायूं में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन,जनहित सत्याग्रह मोर्चा,अखिल भारतीय नौजवान सभा एवं नव क्रांति दल के संयुक्त तत्वाधान में उनके जीवन दर्शन पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गयाl
विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए जनहित सत्याग्रह मोर्चा के अध्यक्ष प्रेमपाल सिंह ने कहा कि भगत सिंह तुम जिंदा हो हर एक लहू के कतरे में क्योंकि भारत के महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह की जयंती हर साल 28 सितंबर को मनाई जाती है। यह दिन न केवल उनकी बलिदान और देशभक्ति को याद करने का अवसर है,बल्कि उनके क्रांतिकारी विचारों और इंकलाब जिंदाबाद के नारे की भावना को पुनर्जीवित करने का भी दिन है। इस महत्वपूर्ण दिन पर,हर भारतीय उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता है और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेता है। उनका जीवन मात्र 23 वर्षों का था,पर उन्होंने जो वैचारिक क्रांति की अलख जगाई, उसकी गूंज सदियों तक सुनाई देगी।
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के डॉ.सतीश ने कहा कि भगत सिंह के अनुसार क्रांति का अर्थ: बम और पिस्तौल से कहीं आगे आगे हैl भगत सिंह को अक्सर एक बहादुर क्रांतिकारी के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बम फेंका और असेंबली में इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाया। पर उनका योगदान केवल शारीरिक साहस तक सीमित नहीं था। वे एक गहरे विचारक,अध्ययनशील दार्शनिक और समाजवादी चिंतक थे।
CPIके सचिव बृजभान सिंह ने कहा कि भगत सिंह के लिए ‘इंकलाब’/क्रांति का मतलब केवल सत्ता का परिवर्तन नहीं था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि ‘क्रांति में अनिवार्य रूप से लहूलुहान संघर्ष शामिल नहीं है,न ही उसमें व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए कोई जगह है। यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं है। क्रांति से हमारा तात्पर्य है: अन्याय पर आधारित मौजूदा व्यवस्था में बदलाव।
मोर्चा के महामंत्री चरन सिंह यादव ने कहा कि भगत सिंह का सपना एक ऐसे भारत का था जहां किसी का किसी के द्वारा शोषण न हो- न गोरे शासक द्वारा,न ही किसी भारतीय पूंजीपति द्वारा। वह एक समानतावादी,धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी समाज की स्थापना चाहते थे।
पवन कुमार एडवोकेट ने कहा कि भगत सिंह ज्ञान और विचार की मशाल थेl वे अपनी शहादत से पहले 700 से अधिक दिनों तक जेल में रहे,और यह समय उन्होंने पढ़ने और लिखने में बिताया। जेल के एकांत में उन्होंने लेनिन,मार्क्स और बर्ट्रेंड रसेल जैसे विचारकों को पढ़ा और अपने लेखों के माध्यम से अपने विचारों को स्पष्ट किया।
ट्रेड यूनियन के साथी हर्षवर्धन ने बताया कि उनका प्रसिद्ध निबंध ‘मैं नास्तिक क्यों हू जिसे उन्होंने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितंबर 1931 को लाहौर के अखबार ‘द पीपल’ में प्रकाशित हुआ। यह लेख उनकी तार्किक क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रमाण है।भगत सिंह रूढ़िवादिता और अंधविश्वास के घोर विरोधी थे। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे धार्मिक संकीर्णताओं से ऊपर उठकर राष्ट्र और मानवता के लिए सोचें।
योगेश कुमार ने कहा कि आज के भारत में भगत सिंह की प्रासंगिकता भगत सिंह जयंती के अवसर पर हमें केवल उन्हें श्रद्धांजलि नहीं देनी चाहिए, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करना चाहिएl
कार्यक्रम में राकेश कुमार सागर शिव कुमार सागर विपिन कुमार प्रेमपाल सिंह चरण सिंह यादव रामचंद्र हर्षवर्धन डॉ सतीश कृष्ण गोपाल गुप्ता ऋषि कुमार योगेश कुमार आदि लोगों उपस्थित रहेl

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