6:39 pm Wednesday , 22 July 2026
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भगवान परशुराम ने भगवान शिव से शस्त्र विद्या ग्रहण की

सौम्य सोनी की रिपोर्ट
परशुराम जी हिंदू धर्म के एक महत्वपूर्ण देवता हैं। परशुराम भगवान विष्णु के छठे आवतार माने जाते हैं। उनके पिता का नाम जमदग्नि था जो एक ऋषि थे। परशुराम जी की मार्ता का नाम रेणुका था। वे तपस्विनी थीं और बहुत ही सात्विक स्वभाव की थीं। परशुराम जी का जन्म का नाम राम था लेकिन जब उन्होंने भगवन शिव से शस्त्र विद्या ग्रहण की तब भगवान शिव उनके कौशल को देखकर प्रसन्न हुए और इसीलिए भगवान् शिव ने उनको अपना परशु भेंट किया। भगवान शिव से प्राप्त परशु को धारण करने के कारन उनका नाम परशुराम पड़ा। परशुराम जी एक बहुत ही शूरवीर थे और धर्म के प्रति अत्यंत निष्ठावान थे। उन्होंने बहुत से अधर्मियों को भार गिराया था तथा भगवान विष्णु के अवतार के रूप में भी कार्य किए थे। उन्होंने अपने पिता के हत्या का प्रतिशोध लेने लिए सहस्त्रबाहु के पूरे वंश का नाश किया तथा पूरी पृथ्वी को 21 बार क्षत्रियों से विहीन कर दिया। इसके बाद से परशुराम जी का नाम क्षत्रियों के लिए एक भयंकर संकट बन गया था। परशुराम जी अमर तथा चिरंजीवी है। उनका इतिहास रामायण और महाभारत काल से भी पहले का है।

परशुराम जी का जन्म

भगवान परशुराम का जन्म त्रेता महर्षि भृगु के पुत्र जमदग्नि के पुत्र के रूप में मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के मानपुर गाँव के जानापाव पर्वत पर हुआ था। ऋषि जमदग्नि ने पुत्र कामेष्टि यज्ञ संपन्न किया जिससे प्रसन्न होकर देवराज इंद्र ने उन्हें वरदान दिया जिसके फलस्वरूप उनके घर में परशुराम जी का जन्म हुआ। उनका शुरुआत का नाम जामदग्न्य था जोकि उनके पिता जमदग्नि के नाम पर पड़ा। लकिन भगवन शिव का परशु धारण करने के बाद से ही उनको परशुराम के नाम से जाना जाने लगा। उनके चार भाई और थे जिनका नाम रुक्मवान, सुखेण व विश्वानस था तथा पांचवे स्वयं परशुराम जी थे
परशुराम ने क्यों काटा अपनी ही माता का सिर

एक बार की बात है जब ऋषि जमदग्नि हवन कर रहे थे। हवन के लिए उन्होंने अपनी पत्नी रेणुका को गंगा नदी का जल लाने के लिए कहा। जब परशुराम की माता रेणुका गंगाजल लेने के लिए गंगा तट पर जाती है। संयोगवश उसी समय गंधर्व राज चित्ररथ अप्सराओं के साथ बिहार कर रहे थे। उनको देखकर रेणुका उनसे आसक्त हो जाती है और वहीं पर रह कर उनको देखने लगती है जिससे उन्हें समय का बोध नहीं रहता।

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