

छिबऊ कला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में स्वामी हंसानन्द गिरी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का मनमोहक वर्णन किया। कथाप्रसंग में उन्होंने बताया कि जब इन्द्रदेव ने क्रोधित होकर ब्रजभूमि पर लगातार भीषण वर्षा बरसाई और चारों ओर जल ही जल दिखाई देने लगा, तब गोपालकृष्ण ने अपनी छोटी करणी उंगली पर संपूर्ण गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों को प्रलय जैसी आपदा से बचाया।महाराज ने कहा कि यह प्रसंग केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि जब-जब भक्त संकट में पड़ते हैं, भगवान उनके रक्षक बनकर सामने आते हैं। श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को भयमुक्त करते हुए यह संदेश दिया कि सच्चे विश्वास और भक्ति के बल पर किसी भी संकट को दूर किया जा सकता है। स्वामी हंसानन्द गिरी महाराज ने आगे कहा कि गोवर्धन धारण लीला भगवान के प्रेम, करुणा और अटूट शक्ति का जीवंत उदाहरण है। इस प्रसंग को सुनते ही कथा पंडाल “गोवर्धनधारी लाल की जय”, “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति और भावविभोर होकर झूम उठे। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में भक्तों ने शामिल होकर इस अद्भुत प्रसंग का श्रवण किया और भगवान कृष्ण की महिमा का गुणगान किया। आज कथा में अयोध्या से चलकर आए कवि सात्विक नीलदीप महाराज और ददरौआ धाम से पधारे डॉक्टर राजेंद्र शास्त्री प्रभारी राष्ट्रीय सनातन सेना भारतभुवनेश शर्मा (भानु)अमित सक्सेना,भूपेंद्र कठेरिया, रवि कठेरिया प्रीतम सिंह,ओमवीर प्रधान, राजू चौहान, विपिन गुप्ता,हरि सिंह, मनवीर सिंह, दुष्यंत चौधरी, मोहित चौधरी, मोनू चौधरी, हाशिम, कासिम, अजय सिंह, विजय सिंह, मुनेंद्र कुमार, पप्पू गुप्ता, दीपक चौधरी नवनीत दीक्षित अतुल दीक्षित इंद्रेश दीक्षित खुशहाली राम, आशाराम, होतम, इंद्रपाल,

























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