3:14 am Tuesday , 21 July 2026
BREAKING NEWS

होली पर गोबर की गूलरी जलाने से नाकारात्मक शक्तियों को होता है नाश हे ऐसी मान्यता ?

।******** बदांयू 9 मार्च।
होली पर गोबर की गूलरी जलाने की परंपरा न केवल धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें छिपा है एक वैज्ञानिक आधार भी। यह परंपरा बुरी नज़र, नकारात्मक शक्तियों, और समस्याओं के निवारण का प्रतीक मानी जाती है।

भारत की संस्कृति में विविधता और परंपरा की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। हर त्योहार को खास श्रद्धा और निष्ठा से मनाने की परंपरा ने हमारी संस्कृति को जीवंत बनाए रखा है। होली, जो हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, इसी प्रकार की एक परंपरा का प्रतीक है। होली का पर्व विशेष रूप से बुराई के अंत और अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है, और इस दिन की खासियत है होलिका दहन की रस्म, जिसमें बुराइयां नष्ट होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

होली के दौरान गोबर से बनी गूलरी या उपले की माला जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। ये गुलरियां खासतौर पर गाय के गोबर से बनाई जाती हैं और होलिका दहन के समय इनको जलाकर पूजा जाती हैं। महिलाएं इस माला को एक रस्सी में पिरोकर होली पर चढ़ाती हैं, और पूजा करती हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों गोबर की गुलरी बनाई जाती है और गाय के गोबर का ही उपयोग क्यों किया जाता है?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गोबर के उपले शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं। जब इन्हें जलाया जाता है, तो जलने के दौरान निकलने वाला धुआं आसपास की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों को समाप्त करने में मदद करता है। यही कारण है कि धार्मिक अनुष्ठानों, जैसे यज्ञ और हवन, में भी गाय के गोबर का उपयोग किया जाता है। इस धुएं से वातावरण शुद्ध होता है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
घर की परेशानियों का निवारण
गूलरी जलाने की परंपरा से यह विश्वास भी जुड़ा हुआ है कि इसे जलाने से घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। गोबर के छोटे-छोटे उपले बनाए जाते हैं और फिर इनसे माला तैयार की जाती है। होलिका दहन के समय जब ये उपले जलते हैं, तो इससे घर की सभी बाधाएं समाप्त होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर के सभी सदस्य मानसिक और शारीरिक रूप से शांति और सुख का अनुभव करते हैं।

हिंदू धर्म में गाय को देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। इस कारण गाय के गोबर का उपयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। गाय के गोबर से बने उपले जलाने से घर का वातावरण शुद्ध रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती ह

बदायूं सिटी माल में अमीबा फूड कोर्ट का धमाका

विज्ञापन एक्सप्रेस