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उझानी एक बाइक पर तीन सवार, ये तो हैं नादान- आप तो दीजिए ध्यान

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27 फरवरी को बदांयू एक्सप्रेस टीम ने जब शहर का जायजा लिया तो शहर के बदायूं रोड, घंटाघर चोराहा,लिंक रोड व बिल्सी रोड इलाके पर यही नजारा देखा। स्कूलों की छुट्टी के बाद किशोर स्कूलों के इर्द-गिर्द खड़े अपने दोपहिया वाहनों को लेकर निकल पड़े। इनमें से अधिकतर ने हेलमेट नहीं लगा रखा था। एक बाइक-स्कूटी पर तीन-तीन बच्चे बैठे थे।

जिले में आऐ दिन हादसे होते हैं,बिना हेलमेट के लोग काल के गाल में समाऐ जाते हैं उसके बाद भी सड़क पर नाबालिग बेरोकटोक वाहन दौड़ा रहे हैं। न तो अभिभावक इन्हें मना कर रहे हैं न ही रास्ते में कोई पुलिसवाला इन्हें रोकता है। घर से स्कूल के लिए निकलते ही एक वाहन पर तीन से चार नाबालिग बिना हेलमेट के फर्राटे भरते दिख जाएंगे। स्कूल पहुंचकर ये वाहनों को बाहर इधर-उधर खड़ा कर देते हैं।

वृहस्पतिवार को बदायूं एक्सप्रेस की नजर जब शहर की सड़कों पर पड़ी तो शहर के घंटाघर चोराहे व बदांयू रोड इलाके पर यही नजारा देखा। स्कूलों की छुट्टी के बाद किशोर स्कूलों के इर्द-गिर्द खड़े दोपहिया वाहनों को लेकर निकल पड़े। इनमें से अधिकतर ने हेलमेट नहीं लगा रखा था। एक बाइक-स्कूटी पर तीन-तीन बच्चे बैठे थे। कुछ पर दो, चार बच्चे भी थे। न उनकी उम्र इस तरह की थी कि उन्हें 16 वर्ष की उम्र के मानक में बिना गेयर वाहन चलाने का लाइसेंस मिल सके। अगर कुछ की उम्र रही भी होगी तो उनके पास लाइसेंस है या नहीं? इसकी जांच करने या रोकटोक करने वाला कोई नहीं था।
———————————————– स्कूलों में यह साफ नियम है कि कोई नाबालिग वाहन लेकर नहीं आएगा। फिर भी स्कूल के बाहर कोई लेकर आता है तो इसके वलिए अभिभावकों को भी कठोर कदम उठाना होगा, तभी बच्चे सुरक्षित रहेंगे।
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सभी अभिभावकों को निर्णय लेना होगा कि वे अपने नाबालिग बच्चों के हाथों में वाहन न दें। -संजय कुमार मित्तल, अभिभावक———————————-
जब वाहनों से बच्चों को लाने ले जाने की सुविधा स्कूल देते हैं तो फिर बच्चों को वाहन देने की जरूरत नहीं।- पुरुषोत्तम दास वार्ष्णेय, अभिभावक।—————————-
सभी विद्यालयों में 18 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों को दुपहिया वाहनों से आने पर रोक लगानी चाहिए। जरूरी हो तो हेलमेट लगाकर ही जाएं। कार से आने वाले सीट बेल्ट लगाएं, इससे आपकी सुरक्षा है।- अंबरीष कुमार, एआरटीओ बदायूं।—————————– राजेश वार्ष्णेय एमके।

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