लघु कथा – नेक इन्सान
हमारी ट्रेन 4 घण्टे देरी से रात 1 : 40 बजे चारबाग लखनऊ स्टेशन पर पहुंची , अब हमें आर्य प्रतिनिधि सभा 5 मीरावाई मार्ग पहुंचना था. बाहर आए तो एक आटो चालक जो हिन्दू था मिला हमने कहा शक्ति भवन चलोगे ? बोला हाँ 200 रुपए होगे i हमने कहा ये तो ज्यादा है ‘ आगे बड़े तो एक लम्बी दाड़ी वाले कोई 55 वर्ष आयु के आटो चालक मिले हमने कहा कि क्या शक्ति भवन चलोगे उन्होंने लखनवी तहजीव में कहा बिल्कुल जनाव ‘ 100 रुपए लगेंगे हम अपने मित्र हरिओम वर्मा के साथ झट से ऑटो में बैठ गए और फिर अपने स्वभाव के अनुसार आटो वाले से कहा आप चाहो तो कुछ और भी यात्री बिठा सकते हो हम चाहते हैं कि इतनी ठंडी रात में तुम्हे कुछ फायदा हो जाए यह सुनकार वे खाँ साहब बहुत खुश हुए और कुछ को बैठाने के लिए प्रयास किया पर कोई न बैठा बिना इन्तजार के वे चल पड़े, बोलने लगे कि आदमी बहुत मिलते है पर इन्सान कम बहुत कम ही मिलते हैं ‘ बेशक हमें कोई सबारी नहीं मिली पर हमें ये सुकुन है कि हम अपने ऑटो में एक अच्छे इंसान को लेकर जा रहे हैं ! हमने कहा आपने कैसे हमें अच्छा इंसान समझा ? वे बोले आपने ऑटो बुक किया था फिर भी आपने मेरे लाभ की बात सोची ‘ यही तो है एक नेक इंसान की पहचान ! तब मैने भी कहा मुझे भी आज खुशी है कि मैं आज बहुत दिनों बाद एक नेक इंसान के ऑटो में बैठा हूँ जो आधी रात को भी तप कर रहा है जहाँ एक हिन्दू ऑटो बाला 200 रुपए मांग रहा था वहीं आपने सीधे आधा कर दिया कोई लालच नहीं ! जब हम अच्छे होते हैं तो हमें भी अच्छे मिलते हैं ! वे हमें शक्ति भवन से आगे सभा तक छोड़ कर आए उन्हें हम अभी तक नहीं भूल पाए !
badaunexpress.com badaunexpress.com | www.badaunexpress.com