गौवंश छोड़ने के मामले में तीसरे दिन मुकदमा, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
कुंवर गांव संवाददाता
कुंवरगांव बदांयू । थाना क्षेत्र में रविवार देर रात गौवंशों को टेंपो से जंगल में छोड़ने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना के बाद पुलिस ने टेंपो चालक को मौके से पकड़ लिया था, लेकिन आरोप है कि उसे करीब दो दिन तक थाने में बैठाए रखा गया और इस दौरान कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। मंगलवार को थाना प्रभारी के अवकाश से लौटने के बाद चार लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर टेंपो सीज कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार रविवार रात करीब 12 बजे बरखिन भट्टे के पास कुछ लोग तीन पहिया लोडर टेंपो से गौवंशों को जंगल में छोड़ रहे थे। सूचना पर पहुंची पुलिस को देखकर तीन लोग अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए, जबकि टेंपो चालक रामगोपाल मौर्य पुत्र रामप्रसाद निवासी बागरपुर, थाना भमोरा, जिला बरेली को मौके से पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसने बताया कि चारे की व्यवस्था न होने के कारण गौवंशों को जंगल में छोड़ने आए थे।
सूत्रों के अनुसार चालक को घटना के बाद से ही थाने में रखा गया, लेकिन दो दिन तक उसके खिलाफ कोई विधिक कार्रवाई नहीं की गई। मंगलवार को थाना प्रभारी राजेश कौशिक के अवकाश से लौटने के बाद मामले में कार्रवाई तेज हुई और देर रात एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस ने रामगोपाल मौर्य के अलावा वीरेश पुत्र राजू, मुट्टी पुत्र राजू तथा प्रमोद पुत्र रामसहाय, सभी निवासी बागरपुर, थाना भमोरा, जिला बरेली के खिलाफ पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 3 एवं 11(1)(i) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। घटना में प्रयुक्त टेंपो को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज कर दिया गया है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक विनोद कुमार को सौंपी गई है।
घटना को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब मुख्य आरोपी घटना के दिन ही पुलिस की हिरासत में था, तो मुकदमा दर्ज करने में दो दिन की देरी क्यों हुई। हालांकि पुलिस ने अब विधिक कार्रवाई पूरी कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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