Aditi Sharma अकेली थी, तब तन्हा थी मगर ख़ुश थी तू यू मेरी ज़िंदगी में मोहब्बत का रंग घोल गया की अब तो तेरे बिना मेरा जिस्म मेरी रूह क्या चीज़ है मेरा बिस्तर तकिया और मेरी चादर भी तेरी राह देख कर तड़पते हैं