Pooja Tiwari
नदी का रुख़ मुड़े, या बुझ जाए दीयों की टिमटिम,
बदल जाए चाहे बरखा की वो मदहोश रिमझिम।
ज़माना तो है मुसाफ़िर, बदलता ही रहेगा,
बदलेगी ना मगर मेरी वफ़ा, है जो ला-फ़ानी-ए-अज़ीम। ✨✍️
वक्त की रफ़्तार अपनी जगह, पर रूह की वफ़ा अपनी जगह। 2026 के बदलते कैलेंडर में, मेरी सादगी ही मेरी पहचान है। 🥀🌿
#MondayMotivation #PoojaThoughts
#पूजा 🫰🥀
#हर_घर_खुशहाली
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