Mona (संप्रेषण) बदले की भावना से सम्बन्ध न ही निभते हैं, और न ही टिकते हैं किसी के। जिसे चाहो, जिसके तुम होना चाहो, उसे समर्पित कर दो खुद को, अपना मन, वचन और सब कुछ. . . यही निश्चल संबन्ध रूपी पौधे के विशाल वृक्ष होने की सच्ची भूमि है।