सारिका सिंह (मनी )
तेरी आरजू मे खोयी हूँ
तू क्या जाने कितनी रात से नहीं सोयी हूँ
एक तेरी खुशी के लिए कुर्बान सारी मस्तीया
तू है तो तो मेरे लिए मामूली सी है सब हस्तीया
तेरी यादो से बाबस्ता है जज़्बात
याद कर तुझे ही रोयी हूँ….
कोई नहीं है तुझसा मेरे लिए कभी
करीब आकर हाल तो देख तुझमे समाई हूँ
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