Mona (संप्रेषण)
तुम्हारी आँखें प्यार नहीं चाहती,
ये उसे पैदा करती है, हमारी आंखों में, अंतर्मन में, मेरी आत्मा में।
वो स्पर्श के बिना ही अपने पास खींच लेती हैं,
बिना आलिंगन के ही अपनी भुजाओं के बीच थाम लेती हैं,
और बिना शब्द उच्चारण के ही साथ निभाने का वादा करती हैं।
एक बात जो आखिरी में कहनी है,
“यदि मोहब्बत का कोई चेहरा होता तो वो तुम्हारी आंखों से मुझे देखता…”
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