जयश्री 🎸
यह नरम-नरम नशा है बढ़ता जाए
कोई प्यार से घुँघटिया देता उठाए
अब बावला हुआ मन, जग हो गया है रोशन
यह नई-नई सुहागन हो गई है तेरी जोगन
कोई प्रेम की पुजारन मंदिर सजाए
हीरे-मोती मैं ना चाहूँ
मैं तो चाहूँ संगम तेरा
मैं तो तेरी, सैयां
– कैलाश खैर, परेश कामथ, नरेश कामथ
#जयश्री 🥀
#पूजा 🫰
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