Ravina Mishra🧚♀️
जो भी अच्छा खराब लिखती हूँ
पत्थरों पर किताब लिखती हूँ
तुमको बेकार भी लगे तो क्या
मैं तो सिर्फ अपने ख्वाब लिखती हूँ
रात दिन कमरे में टहलती हूँ
जब प्रभु के शबाब लिखती हूँ
मुझसे यूँ बेखबर नहीं रहना
मैं सबके हिसाब लिखती हूँ
खूब सजने के बाद हीं पढ़ना
सबके व्यवहारों का जवाब लिखती हूँ
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