HINA_JAISWAL
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में के मेरी नज़र को ख़बर न हो,
मुझे एक रात नवाज़ दे मगर उसके बाद सहर न हो ।
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कभी धूप दे, कभी बदलियाँ, दिल-ओ-जाँ से दोनों क़ुबूल हैं,
मगर उस नगर में न क़ैद कर जहाँ ज़िन्दगी की हवा न हो ।
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सुप्रभात वंदन 🙏🌹😍💐
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