Gunjan Agrawal पता है तुम्हें जब मेघ बरसते हैं और वह बरसात जब मुझे स्पर्श कर आलिंगित करती है तब ऐसा लगता है मानो जैसे तुम मेरे अंदर ही कहीं ठहर गए हो और मुझे रह- रहकर नम कर रहे हो..!!! गुंजन शिशिर