5:50 pm Friday , 31 July 2026
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उलझा हुआ हूं – प्रियंका विवेक सिंह

उलझा हुआ हूं –
लाखों उलझनों में मैं, इस कदर उलझा हुआ हूं।
जितना सुलझाता हूं मैं,उलझता चला जाता हूं।
सुकून की तलाश में मैं ,भटक रहा हूं आजकल।
थके बहुत है पांव मगर, रफ्ता रफ्ता चला जाता हूं।
जितना सुलझाता हूं मैं ,उलझता चला जाता हूं।
लाखों उलझनों में मैं ,इस कदर उलझा हुआ हूं।
अपनी बाजार को समेट ,सोचता हूं लौट जाऊं।
पलके बोझिल सी है, पर सो नहीं पाता हूं।
जितना सुलझाता हूं मैं ,उलझता चला जाता हूं।
लाखों उलझनों में मैं, इस कदर उलझा हुआ हूं।
प्रियंका विवेक सिंह

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