Gunjan Agrawal तुम संग बिताए कुछ "लम्हों की स्मृतियां", मेरे अंग संग रहकर मुझे हर वक़्त थिरकने पर मजबूर करतीं हैं , फिर वह लम्हें "ख्वाब सरीखे" ही क्यों न हों..!!! गुंजन शिशिर