मधुर मधुर पायल की रून-झुन,
फिर लेकर आओ मनमीत ।
मन के तार झंकृत कर दे ,
ऐसा दो जीवन संगीत ।
प्यासा मन प्यासी ये आंखें,
तूफानों सी चलती सांसे ।
मन मंदिर में घिरा अंधेरा ,
अमर ज्योति जलाओ मीत
मन के तार झंकृत कर दे,
ऐसा दो जीवन संगीत ।
उर में लाखोंअरमा लेकर,
चलता जाता हूं राहों पर।
हाथों को हाथों में देकर,
कर दो अमर हमारी प्रीत ।
मन के तार झंकृत कर दे,
ऐसा दो जीवन संगीत ।
प्रियंका विवेक सिंह
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