Vandana shukla
दयानिधि
बस इतना करना
मेरे मन के अवगुण हरना
मुझे
तेरी माया ने घेरा
मेरे मन में ना था तेरा बसेरा
भटकी
बहुत तेरी आस में
तेरे मन मोहक दर्शन की प्यास में
कैसे रहूं
मैं मेरे श्याम अकेली
बिन तेर मेरी कोई ना सहेली
बसकर
मेरे मन मंदिर में श्याम
दे दो अपनी भक्ति अविराम
राधे राधे
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