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जीवन दर्शन हाथ नहीं, दिल थामिए

जीवन दर्शन हाथ नहीं, दिल थामिए।

बदांयू 28 जून।

रिश्ते तर्क से नहीं, स्पर्श से जीते जाते हैं। “हाथ पकड़कर बात कीजिए, बात पकड़कर हाथ मत छोड़िए”—यह वाक्य रिश्तों का पूरा सार है।

हर संबंध में मतभेद आएंगे। मुद्दा यह नहीं कि कौन सही है, मुद्दा यह है कि कौन साथ निभाने को तैयार है। बहस में जीता हुआ इंसान अक्सर रिश्ता हार जाता है। और जो झुकना जानता है, वही रिश्ते को उठाना भी जानता है।

प्रेम, सम्मान और धैर्य—ये तीन खंभे अगर संवाद में खड़े हों, तो गलतफहमी की दीवारें खुद गिर जाती हैं। शब्दों की कठोरता पल भर में चुभती है, पर अपनत्व की गर्माहट उम्र भर याद रहती है।

अहंकार रिश्तों को तोड़ता है, समझदारी जोड़ती है। टूटे रिश्ते जोड़ने में साल लग जाते हैं, संभाले हुए रिश्ते हर रोज़ सहारा देते हैं।

इसलिए अगली बार जब मन करे कि अपनी बात ऊपर रखूँ, एक पल रुककर सोचिए—क्या मैं बहस जीतना चाहता हूँ या रिश्ता बचाना चाहता हूँ?

याद रखिए: सुख बांटने से दोगुना होता है, और दुख थामने से आधा रह जाता है।

बदांयू एक्सप्रेस डेस्क।

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