Vandana shukla
यह समाज
पुरुष प्रधान सभी जानते
स्त्री पुरुष बराबर नेता राग अलापते
क्या कभी
किसी ने स्त्री के हृदय को झांका
किसी के घर की बेटी किसी की बहन
किसी की पत्नी को सदा आगे बढ़ने से रोका
सम अधिकारों
की बात करने वालों से पूंछो
कैसा समाधिकार जिसने स्त्री को
भाग्य नहीं बस भोग समझा यह सोंचो
कभी देखा
ही नहीं वह क्या चाहती है
प्यार भरे दो पल ना सारा संसार मांगती है
प्यार भरा कोमल स्पर्श जो मन की सब पीड़ा हर ले
धन दौलत की चाह नहीं वह प्यार भरे पल मांगती है
#दिल_की_खुशी
मिलती उसको हर पल
अपने प्रियतम की बाहों में
इस खुशी के आगे सब जहां भी फीका लगता
सपनों भरा संसार भी उसको छोटा लगता
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