Vandana shukla
श्री राम चंद्र
कृपालु भजमन
हरण भव भय दारुणम्
नवकंजलोचन
कंज मुख कर कंज
पद कंजारुणम्
कंदर्प
अगणित अमित छवि
नवनील नीरद सुंदरम्
पटपीत
मानहु तड़ित रुचि शुचि
नौमि जनक सुता वरम्
भज
दीनबंधु दिनेश दानव
दैत्यवंश निकंदनम्
रघुनंद
आनंदकंद
कौशल चंद दशरथ नंदनम्
सिर मुकुट
कुंडल तिलक चार
उदार अंग विभूषणम्
आजानुभुज
शर चाप धर
संग्राम जितना खर दूषणम्
इति वदति
तुलसीदास
शंकर शेष मुनि मन रंजनम्
मम हृदय
कंज निवास कुरु
कामादि खल दल गंजनम्
#श्री_राम_शरणम्
#शुभ_प्रभात_वंदन
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