Vandana shukla
हवाओं से कह दो
कहीं और को जाएं
बहारों से ये कह दो
कहीं और बरसाएं……!!
बरस
रही ये आंखें
कब तक बरसेगीं
आंखें ये दिलवर को
जाने कब तक तरसेंगी……!!
अहसास
से बढ़कर थे
जो मेरी जिंदगी के
जिनके संग देखे थे
सब सपने खुशी के…….!!
जाने क्यों
दिल में वीरानी छाई
मेरे दिल पर भी उसे
जरा भी दया नहीं आई
साथ छूटा दिल टूटा अब
तन्हा ही अब हम जीते हैं
याद में उनकी अब भी
दिल में बहुत रोते हैं. ………..!!
क्या समझूं
तेरा यही प्यार
हर पल बस इंतजार
मन भर गया हो मुझसे
तो कह दो ना
यूं मेरा दिल तो ना जलाओ
छोड़कर तन्हा
मुझसे दूर ना जाओ……….!!
सात
जन्मों का वादा था
एक जन्म भी ना झेला
प्यार का कौन सा खेल खेला
अहसास ही
खत्म हो गये हों
तो फिर क्या करें
चलो अपनी राहें
अब अलग करें……….!!
कम से कम
दिल तो ना रोएगा
प्यार का
बोझ नहीं ढोएगा
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