neelam
नही मेरा,उस से मोहब्बत है तो है
ये रस्मो रिवाजो से बगावत है तो है,
सच को सच कहा
कह दिया तो कह दिया,
जमाने की नजर मे ये हिमाकत है तो है,
कब कहा वो मिल जाए मुझको
गैर न हो जाए वो
इतनी हसरत है तो है,
दोस्त बन दुश्मनो सा सताता है
फिर भी उस ज़ालिम पे मरना
अपनी फितरत है तो है
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