Laxmi Singh
मैं कोई खामोश कहानी नहीं,
अपने सपनों की रवानी हूँ मैं।
दर्द ने लाख आज़माया मुझे,
फिर भी हँसती हुई निशानी हूँ मैं।
घर की चौखट से आसमान तक,
हर रिश्ते की निगहबानी हूँ मैं।
कमज़ोर समझने की भूल न करना,
वक़्त पड़े तो आग और पानी हूँ मैं।
सम्मान से जो देखे, उसकी ताक़त हूं मैं
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