VeenaShri
हल्की-हल्की सी बूंदे है
हल्की- हल्की सी है हवा
मिट्टी की सोंधी खुशबू – सी
उनकी यादें है जवां
ज्यों – ज्यों गिरती बूंदें गालों पर
एहसास कराती किसी के होने का
चेहरे को सहलाती हुई जुल्फें
हौले से आकर कहती
तेरा मेरा साथ है ऐसा
जैसे सागर और किनारे का
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