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जनगणना-डाटा नहीं होगा चोरी, घर-घर गिनती के बाद भी फोन में सेव नहीं रहेगी जानकारी

जनगणना-डाटा नहीं होगा चोरी, घर-घर गिनती के बाद भी फोन में सेव नहीं रहेगी जानकारी।

बदांयू 30 अप्रैल।

जनगणना को इस बार पूरी तरह डिजिटल ढांचे में तैयार किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि घर-घर जाकर जुटाई जाने वाली जानकारी किसी भी गणनाकर्मी या सुपरवाइजर के मोबाइल में सेव नहीं रहेगी। डाटा दर्ज होने के बाद सीधे सुरक्षित सरकारी सर्वर तक पहुंच जाएगा।

सरकार का मकसद है कि इससे साइबर अपराध, मोबाइल चोरी, हैकिंग और निजी जानकारी के दुरुपयोग के खतरे को कम करना है।

अधिकारियों के अनुसार जनगणना में पहली बार ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें मोबाइल फोन केवल डाटा एंट्री का माध्यम होगा, उसमें स्थायी स्टोरेज नहीं रहेगा। यानी कर्मचारी जैसे ही किसी परिवार का विवरण एप में भरेंगे, नेटवर्क उपलब्ध होने पर जानकारी एन्क्रिप्ट होकर सर्वर पर भेज दी जाएगी। इसके बाद मोबाइल पर उसकी कॉपी नहीं रहेगी।

अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डाटा चोरी और साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी के बाद सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई। इसी कारण नो लोकल स्टोरेज व्यवस्था अपनाई है, ताकि किसी उपकरण के गुम होने या गलत हाथों में जाने पर नागरिकों की निजी जानकारी तक पहुंच न बन सके।

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से हो रही है। प्रगणकों को भी इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पांच मई के बाद व्यक्ति स्वयं भी अपना विवरण पोर्टल पर भर सकता है। डिजिटल होने के बाद भी व्यक्ति का डाटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। सर्वे के दौरान परिवारों से जुटाई गई जानकारी फोन से सीधे सुरक्षित सर्वर में ही पहुंचेगी। इसके लिए सरकार की ओर से भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

जनगणना के पहले चरण में मकानों की सूची, भवन की स्थिति और बुनियादी सुविधाओं का विवरण जुटाया जाएगा। दूसरे चरण में परिवार के सदस्यों, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक व आर्थिक स्थिति समेत अन्य निर्धारित सूचनाएं ली जाएंगी। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रत्येक जनगणना कर्मी को औसतन 200 परिवारों का दायित्व सौंपा है। उन्हें रोजाना करीब 20 परिवारों की एंट्री का लक्ष्य बताया गया है। इसके लिए मोबाइल एप संचालन, पहचान सत्यापन, लोकेशन टैगिंग और डेटा अपलोड की प्रक्रिया समझाई जा रही है। इस प्रक्रिया के दौरान किस कर्मचारी ने कितने घरों का सर्वे किया, कितनी प्रविष्टियां लंबित हैं और कौन सा क्षेत्र बाकी है, इसकी जानकारी कंट्रोल रूम स्तर पर ऑनलाइन देखी जा सकेगी। इससे काम की गति पर नजर रखने के साथ त्रुटियों को तुरंत सुधारने की गुंजाइश रहेंगी।

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