सुनीता पाण्डेय ‘सुरभि’🪈🦚🪷🪄🕉️
तमस धरा का मिट गया, है प्रकाश चहुँ ओर।
मन में जागी आस है, होगी मंगल भोर।।
यदि हम मन में ठान लें, करेंगे कमियांँ दूर।
कोई भी तब लालसा, नहीं करे मजबूर।।
दीन-दुखी के सामने, नहीं रहो मगरूर।
गुण देवत्व के हैं यही, गुन लो इसे जरूर।।
– सुनीता पाण्डेय ‘सुरभि’
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