7:29 am Monday , 20 July 2026
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शिवस्वर्णमाला स्तुति: – Jaya Kishori

Jaya Kishori
शिवस्वर्णमाला स्तुति:

महादेव को प्रसन्न करने का अत्यंत सिद्ध और चमत्कारिक मार्ग! भगवान शिव की यह ‘स्वर्णमाला स्तुति’ केवल कुछ पंक्तियां नहीं हैं, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक अद्भुत साधन है। जो भी भक्त सच्चे मन से महादेव के इन स्वरूपों का ध्यान करता है, उसके जीवन से हर प्रकार का भय और नकारात्मकता दूर हो जाती है

शिव स्वर्णमाला स्तुति:

ईशगिरीश नरेश परेश महेश बिलेशय भूषण भो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे ईश, गिरीश, नरेश, परेश, महेश, सर्पों के आभूषणधारी भगवान! हे साम्ब, सदाशिव, शम्भो, शंकर! मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ

उमया दिव्य सुमङ्गल विग्रह यालिङ्गित वामाङ्ग विभो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे देव! जिनके वामांग में माता उमा दिव्य रूप से विराजमान हैं। हे साम्ब, सदाशिव! मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ

ऊरी कुरु मामज्ञमनाथं दूरी कुरु मे दुरितं भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे प्रभु! मुझ अज्ञानी, अनाथ को अपनी शरण में लीजिए। मेरे सारे दुःख, पाप दूर कीजिए। मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ

ॠषिवर मानस हंस चराचर जनन स्थिति लय कारण भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे प्रभु! आप ऋषियों के मानस रूपी हंस हैं। आप ही इस चराचर जगत के जन्म, पालन और लय के कारण हैं। मैं आपकी शरण में हूँ

अन्तः करण विशुद्धिं भक्तिं च त्वयि सतीं प्रदेहि विभो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे विभो! मुझे अंतःकरण की शुद्धि और अपनी सच्ची भक्ति प्रदान कीजिए। मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ

करुणा वरुणा लय मयिदास उदासस्तवोचितो न हि भो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे करुणा के सागर! मैं आपका दास हूँ, यद्यपि मैं आपकी कृपा का पात्र नहीं, फिर भी हे शम्भो! मैं आपकी शरण में हूँ

जय कैलास निवास प्रमाथ गणाधीश भू सुरार्चित भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे कैलाश निवासी, प्रमथ गणों के स्वामी, देवताओं द्वारा पूजित! जय हो! मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ

झनुतक झङ्किणु झनुतत्किट तक शब्दैर्नटसि महानट भो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे महानट! आप डमरू के नाद के साथ अद्भुत तांडव नृत्य करते हैं। मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ

धर्मस्थापन दक्ष त्र्यक्ष गुरो दक्ष यज्ञशिक्षक भो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे धर्म स्थापना में दक्ष, त्रिनेत्रधारी गुरु! हे दक्ष के यज्ञ का संहार करने वाले! मैं आपकी शरण में हूँ

बलमारोग्यं चायुस्त्वद्गुण रुचितं चिरं प्रदेहि विभो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे विभो! मुझे बल, आरोग्य, दीर्घायु और अपने गुणों में रुचि प्रदान करें। मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ

शर्व देव सर्वोत्तम सर्वद दुर्वृत्त गर्वहरण विभो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे सर्वोत्तम देव, हे सर्वदा दुष्टों के गर्व को हरने वाले विभो! मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ

भगवन् भर्ग भयापह भूत पते भूतिभूषिताङ्ग विभो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे सबका पोषण करने वाले, भय को दूर करने वाले, भूतों के स्वामी और भस्म रमाने वाले विभो! मैं आपकी शरण में हूँ

षड्रिपु षडूर्मि षड्विकार हर सन्मुख षण्मुख जनक विभो
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे षड्रिपु, षडूर्मि और षड्विकार को हरने वाले! हे कार्तिकेय के जनक! मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ

सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्मे त्येल्लक्षण लक्षित भो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे प्रभु! आप सत्य, ज्ञान, अनंत और परब्रह्म हैं। मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ

हाऽहाऽहूऽहू मुख सुरगायक गीता पदान पद्य विभो।
साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

हे विभो! देव गायक भी आपके गुणों का गान करते हैं। मैं आपके चरणों की शरण लेता हूँ

इस दिव्य स्तुति के लाभ-
इसे सुनते या पढ़ते ही मन की सारी बेचैनी मिट जाती है। घर के वातावरण से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल का प्रवेश होता है। शिव जी स्वयं “भयापह” हैं, वे हर प्रकार के डर और संकट को हर लेते हैं

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