Kshama
पत झड़ अगर ना होता तो…
बसंत के सुख को कोई समझ नहीं पाता..!
अधियाँरी रात ना आती तो…
उजालों की कीमत कोई जान नहीं पाता..!
ये आँसू अगर नहीं होते…
तो खुशियों को बुरी नज़र से..
कोई नहीं बचाता..!
काँटे अगर नहीं चुभते तो
फूलों की खुशबू को इत्र सा कोई नहीं महकाता..!
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