Jaya Kishori
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हम इस दुनिया में सिर्फ देखने के लिए नहीं आए हैं। हम जो सोचते हैं, जैसा महसूस करते हैं, वही इस संसार की सूक्ष्म नींव बनता है।* हर विचार एक तरंग है, जो हमारे भीतर से निकलकर वातावरण में घुल जाती है। धीरे-धीरे वही तरंगें माहौल बनाती हैं, परिस्थितियाँ रचती हैं, और फिर वही हमें बाहर दिखाई देने लगती हैं
अक्सर हम हालातों को दोष देते हैं, लोगों को कारण मानते हैं, *लेकिन सच यह है कि दुनिया पहले भीतर बनती है, बाद में बाहर दिखाई देती है।* जब मन अशांत होता है, तो वही अशांति वातावरण में फैलती है। और जब हम स्वयं स्थिर होते हैं, तो बिना कुछ कहे भी शांति की अनुभूति दूसरों तक पहुँचती है
इसलिए जीवन का सबसे बड़ा योगदान बाहर कुछ बदलना नहीं, भीतर सही निर्माण करना है। *एक शुद्ध संकल्प, एक शांत भावना, एक स्थिर स्थिति… यही संसार को बदलने की असली शुरुआत है

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