neelam
बिखरा के जुल्फें झुक जाओ मुझपे
मिलने दो साया तपते बदन को,
मैंने हमेशा तेरी अमानत
समझा है मेरे जानाज़ तन को,
रूहों के रूहों से,
जिस्मों के जिस्मों से,
सदियों के नाते है,
मस्ती के घेरे में,
खुशबू के डेरे में,
हम खो जाते हैं,
बांहों में तेरी मस्ती के घेरे….😍
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