4:32 pm Sunday , 19 July 2026
BREAKING NEWS

जन्म के सदुपयोग पर ध्यान- Jaya Kishori

Jaya Kishori

मनुष्य जन्म के सदुपयोग पर ध्यान देना चाहिए

जीवनचर्या के संबंध में यदि संकुचित दृष्टिकोण न अपनाया जाता रहे, तो स्वार्थ और परमार्थ का समन्वय साथ-साथ भली प्रकार चलता रह सकता है। कठिनाई तब पड़ती है, जब मनुष्य संकीर्ण स्वार्थपरता के शिकंजे में बुरी तरह कस जाता है। पेट-प्रजनन को ही सब कुछ मान लेता है। वासना, तृष्णा और अहंता की पूर्ति के अतिरिक्त और कुछ सूझता ही नहीं।
लोभ, मोह और अहंकार के दलदल में पैर से सिर तक धँस जाता है। यही वह मनःस्थिति है, जिसमें मनुष्य सर्वदा अपने को अभावग्रस्त अनुभव करता है, असन्तुष्ट रहता है। नशेबाज को हर घड़ी खुमारी में डूबे रहने की आवश्यकता प्रतीत होती है। इसी प्रकार लिप्सा-लालसाएँ भी मनुष्य को निरन्तर स्वार्थ सिद्धि” में लिप्त रहने के लिए बाधित करती हैं तथा व्यक्ति सदा व्यस्तता, अभावग्रस्तता और चिंता भरी उलझनों का रोना रोते हुए यह सिद्ध करने का प्रयत्न करता है कि उसकी परिस्थितियाँ ही विकट हैं।
ऐसी दशा में कुछ कर पाने को कैसे अपने कदम बढ़ाएँ ? वस्तुतः यह स्थिति किसी की भी नहीं होती, जिसमें वह स्वार्थ के साथ परमार्थ का समन्वय न कर सके। यदि सुरसा जैसा मुँह फाड़े रहने वाली हविश की निरर्थकता सोची जा सके. औसत नागरिक स्तर का निर्वाह स्वीकार किया जा सके, मनुष्य जन्म की दुर्लभता पर विचार किया जा सके। उसके सदुपयोग की बात पर ध्यान दिया जा सके।
मानवी गरिमा उपलब्ध होने पर मिलने वाले आत्मसंतोष, लोक सम्मान, व्यापक सहयोग एवं भविष्य की महान् संभावनाओं पर विचार किया जा सके, तो दूरदर्शी विवेकशीलता का स्पष्ट परामर्श एक ही होगा कि निर्वाह जुटाया तो जाए, पर उसी पर निछावर कर पशु स्तर का हेय जीवन न जिया जाए। इस मार्ग पर चलते-चलते अपराधी, नर-पिशाच जैसी स्थिति ही पल्ले बँधती है, जिसमें न लोक है न परलोक, न सुख है न शांति।
तृष्णाएँ आज तक किसी की पूरी नहीं हुईं। आग में ईंधन डालते रहने पर वह बुझती नहीं वरन् और भी अधिक मड़कती है। एक कामना के पूरी होते-होते दस और नई कामनाएँ उठ खड़ी होती हैं। व्यक्ति की क्षमता और पात्रता सीमित है। आयुष्य भी थोड़ा है। अधिकांश समय तो सोने में, नित्य कर्म में, बचपन में, बुढ़ापे में निकल जाता है। समर्थता के कुछ वर्ष ही ऐसे बचते हैं, जिन्हें या तो पूरी तरह तृष्णा पर न्यौछावर कर दिया जाए या फिर उस अवधि में परमार्थ को भी सम्मिलित कर लिया जाए।

विज्ञापन एक्सप्रेस