Jaya Kishori
दादशमुखी रुद्राक्ष
इस रुद्राक्ष की नित्य पूजा से सभी प्रकार के दुखों से छुटकारा मिल जाता है। दादशमुखी रुद्राक्ष वाला रुद्राक्ष जो कर्ण मैं धारण करें, उसे बारह आदित्य प्रसन्न होते हैं। गोमेद और अश्वमेध का फल प्राप्त होता है। उसे सिंह वाले शास्त्रधारी और व्याघ्र आदि का डर नहीं होता है। उसको आधी व्याधि का भय नहीं सताता है। अपतु सर्वत्र सुख प्राप्त होता है तथा अधिपति बनता है। हाथी, अश्व, मृग, मूषक, खर, कुत्ते आदि बहू तेरे जिवो को मारकर भी दादशमुखी रुद्राक्ष से उसका पाप नष्ट हो जाता है। यह बुद्धि तीव्र करता है, स्मरण शक्ति बढ़ाता है। मानसिक विकारों को दूर करता है। चित शांत रखता है और प्रत्येक साधना में ध्यान एकाग्र करता है।दादशमुखी रुद्राक्ष आदित्य स्वरूप तेजस्वी महाविष्णु का कारक है। किसी धारण करने वाला प्राणी राजा बनने के योग्य होता है। चोर, अग्नि, दरिद्रता एवं व्याधियों से मुक्ति मिलती है। धन पुत्र आदि की प्राप्ति होती है।
सोमवार के दिन प्रात काल सूर्योदय होते ही सूर्य की किरणों को हाथ में लेकर दादश मुखी रुद्राक्ष को स्नान कराया एवं नारायण को नमस्कार करें। तदनंतर इसे भगवान के समीप रखें। फिर काले धागे में गुथकर विधि पूर्वक *ॐ हीं श्रो घृणि : श्रीं* मंत्र उच्चारण के साथ गले में धारण करें। शासन की इच्छा करने वाले मनुष्य को इसके धारण से बड़ा लाभ एवं यश प्राप्त होता है।
यह दाना बहुत कठिनाई से मिल पाता है। इसे धारण करने वाले सड़क में चिकित्सक गुणो का समावेश हो जाता है। यह सधाक को अनेक प्रकार की दुर्लभ शक्तियां प्राप्त करने में सहायता करता है
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