Jaya Kishori
हमारा जीवन कैसा हो
हमारा जीवन भोगमय नहीं योगमय होना चाहिए। सफलता अकेले नहीं आती वह अपने साथ अभिमान को लेकर भी आती है और यही अभिमान हमारे दुखों का कारण बन जाता है
सफलता व असफलता से कुछ सीख लेना एक योगी का लक्षण है। प्रकृति ने प्रत्येक मनुष्य को जीवन जीने के दो मार्ग दिए हैं। हम अपने जीवन को योगी बनाकर जिएं अथवा भोगी बनाकर ये व्यक्ति के स्वयं के ऊपर निर्भर है
अत: हर स्थिति का मुस्कराकर सामना करने की क्षमता, किसी भी स्थिति को अच्छी या बुरी न कहकर समभाव में रहते हुए अपने कर्तव्य पथ पर लगातार आगे बढ़ने का कौशल, यही जीवन का योग है
जय श्री कृष्ण
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