8:55 pm Sunday , 19 July 2026
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श्रेष्ठ पथ को ही चुनें – Jaya Kishori

श्रेष्ठ पथ को ही चुनें – Jaya Kishori

हमारे पास पद छोटा अथवा बड़ा कोई भी हो लेकिन पथ श्रेष्ठ ही होना चाहिए ये महत्वपूर्ण है। जीवन में पद से ज्यादा महत्व पथ का है इसलिए पदच्युत हो जाना लेकिन भूलकर भी कभी पथच्युत मत हो जाना। पथच्युत हो जाना अर्थात उस पथ का त्याग कर देना जो हमें सत्य और नीति के मार्ग से जीवन की ऊंचाईयों तक ले जाता है। पथच्युत होने का अर्थ है, जीवन की असीम संभावनाओं की ओर बढ़ते हुए कदमों का विषय वासनाओं की दलदल में फँस जाना

महान लक्ष्य के अभाव में जीवन केवल प्रभु द्वारा प्राप्त इस मनुष्य देह का तिरस्कार ही है और कुछ नहीं। पद से गिर भी गए तो संभलना आसान है लेकिन पथ से गिरकर संभल पाना आसान नहीं। महानता के द्वार का मार्ग मानवता से होकर ही गुजरता है। मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म और उपासना है। मानवता रुपी पथ का परित्याग ही तो पथच्युत हो जाना है

जय श्री राधे कृष्णा जी

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