PRIYA SHARMA
रात की आग में जिस्म भी पिघलने लगे,
तेरे करीब आकर होश सब मचलने लगे।
तेरे हाथों की हर हरकत जादू सी लगती है,
मेरे लब भी तेरे लबों को छूने को जलने लगे।
सांसों की गर्मी में ये फासले मिट जाते हैं,
तेरी बाहों में आते ही इरादे बदल जाते हैं।
जिस्म से जिस्म तक ये सिलसिला यूँ ही चले,
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