Ravina Mishra
लोकतंत्र में बहुत अच्छा तो बहुत कुछ बुरा भी है लेकिन मैं बहुत पढ़ी इस विषय पर लेकिन साम्यवाद, कैपिटलिज्म, निहिलिज्म और भी ढेर सारी दुनिया की वाद, थक कर लोकतंत्र हीं ठीक लगा, सबसे बुरा जो समझ आया वो छद्म धर्मनिरपेक्षता और वोट बैंक, या आरक्षण की चाटुकारिता और फ्री फोकट का माल।
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