Smart Naina
एक तितली मिली थी कल शाम
अपने पंखों को फैला कर
बाहों में कसा मुझे इस तरह
कि उसके सारे रंग मेरे ज़ख्मों से गुज़र कर
ख़ून में मिल गए
थका जिस्म फिर से पहाड़ की तरह
विशाल और अटल हो गया है
मन में कई फूल खिले हैं
महकते रसीले
ओ मेरी तितली सुनो
मैं चाहती हूँ तुम
इसी बाग़ में मंडराी रहो
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