PRIYA SHARMA रात की बाहों में सिमटा तेरा मेरा जहाँ, खामोश लम्हों में धड़कता इश्क़ का कारवां। छूकर तुझे हर एहसास हो जाए बेपरवाह, तेरे साथ ये रात लगे जैसे रुका आसमां।