Mahi सोच के दरिया में अक्सर डूब सी जाती हूँ लिखने बैठती हूँ मगर खुद में ही खो जाती हूँ जब तक रूह की आवाज़ ना दे दस्तक दिल पर मैं अल्फ़ाज़ों को बस छूकर ही लौट आती हूँ".!🦋