सारिका सिंह (मनी )
तुझसे लड़े तो सकूँ था
बेझिक कहूँ तो तेरे इंतजार मे भी सकूँ था
भले तू संजीदा सलिका नहीं रखता था दौरान इश्क
सच कहुँ तो उसमे भी मुझे परहेज नहीं था
क्यूँ करती है आँखे इंतजार तेरी
मुझे तो इश्क मे ये भी कबूल था
यकीन नहीं होगा तुझे पता नहीं
मगर मुझे तेरा बेरंग इश्क भी कबूल था…..
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