Jaya Kishori
आज नवदुर्गा पूजा का सातवां दिवस है और मां दुर्गा की सातवीं शक्ति “कालरात्रि है।
इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। सिर के बाल बिखरे हुवे हैं। गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। इनके ब्रम्हांड के सदृश्य गोल तीन नेत्र हैं। इनकी नासिका के श्वास-प्रश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालायें निकलती रहती हैं। इनका वाहन गर्दभ है। ऊपर उठा हूआ दाहिना हाथ सभी को वर प्रदान करता है, दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है। बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और नीचे वाले हाथ में खड्ग (कटार) है।
इस प्रकार मां रूप देखने में तो अत्यंत भयानक है परन्तु ये सदैव शुभ ही फल देने वाली हैं। इसी कारण इनको “शुभंकरी” भी कहा गया है। अत: इनसे भक्तों को कतई भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।
आज मां कालरात्रि की उपासना करने वाले साधकों का मन “सहस्त्रार चक्र” (क्राउन चक्र) में स्थित होता है और आज इनकी उपासना से साधक के लिये ब्रम्हांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है।अत: इनकी कृपा से वह सर्वथा भयमुक्त हो जाता है
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