सुनीता पाण्डेय ‘सुरभि’🪈🦚🪷🪄🕉️

फुदक- फुदक कर चलती हूँ ।
मैं चीं, चीं, चूँ ,चूँ करती हूँ ।
बच्चे देख मुझे खुश होते –
करते संग मेरे मनमानी ।
डाली से कूदी मैं आँगन,
ठुमक चली तो, कभी चली तन-
बच्चों को करतब दिखलाती –
बन जाती मैं बड़ी सयानी ।
– सुनीता पाण्डेय ‘सुरभि’
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